ज़िन्दगी…

सुकून का हर एक पल धुँवा हो जाता हैं,
जवानी से जब बचपन जुदा हो जाता हैं।

मेरे नसीब का नसीब छोड़ो यारो,
मेरा तो समंदर भी कुँवा हो जाता हैं।

मुश्किलो से लाख दफा लड़ा हु मैं,
हर दफा उसका अंदाज़ जुदा हो जाता हैं।

बहुत लंबे वक्त तक चली वक़्त से मेरी जंग,
हर वक़्त मेरा वक़्त बुरा हो जाता हैं ।

मेहनताना यही मिलता हैं मुझे ज़िन्दगी का,
हर ज़ख्म हर रात भरता है हर सुबह नया हो जाता है।

#SelfRachit

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छुवन…

मुझको निकली हैं कोई तरंग छूकर,
निकला हो पानी को जैसे कोई रंग छूकर…

हमेशा से बापर्दा रही हु मैं,
जाने कैसे निकल गया वो मेरा अंग छूकर…

बहुत लापरवाह हुआ करती थी मेरी हस्ती
अब तो निकला हैं मुझको कोई ढंग छूकर…

तेरे सिवा अब इसमें सफर कोई कर नही सकता,
देखी हैं मैने वो दिल की गली तंग छूकर…

कर देती हैं ये किस कदर बावरी,
देख ले तू इश्क़ को तू मेरे संग छूकर… 🙂

#SelfRachit

“आखिरी मोहब्बत…”

मैं टूटा हुआ बिखरा था

तेरे आने से ज़िंदगी मिली…

ये मेरे दिल नशी, मैं रात था

तुझसे मुझे रोशनी मिली…


 क्या कह दु की बयान हो जाये इश्क मेरा,

ठंडी हवाओ को जैसे धूप सुनहरी मिली…


बहुत मिले लोग मुझे…मिल कर गुज़र गये,

मेरे लिये ठहरने वाली तु पहली मिली…


डायरी का कोरा पन्ना थी मेरी ज़िंदगी,

तुझसे मिला तो इसे कहानी मिली…


 क्या हुआ जो ना था तेरा पहला,

मैं आखिरी हुआ…ये क्या कम खुशी मिली!!

#SelfRachit

“परिंदा…”

अपने ही वजूद पर शर्मिन्दा हुँ मैं,
घोसला छोड़ निकला परिंदा हुँ मैं…

रोकती हैं मुझे हर पल ये हवा,
अपने परो की ज़िद का पुलिन्दा हुँ मैं…

ज़मीं से उठा हुँ मैं अपने दम से,
आसमानो को लुटता दरिन्दा हुँ मैं…

भिड़ थी दुश्मनो की ज़मीं पर बहुत,
अब बादलो की बस्ती का बाशिन्दा हूँ मैं…

थम जायेगी साँसे मेरी परो के थमते,
जब तलक हवा मे हुँ… ज़िंदा हुँ मैं…

#SelfRachit

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“क्यु नही जाते…”

मेरी ज़िंदगी से ये सहारे क्यु नही जाते ?,
समन्दर से दुर किनारे क्यु नही जाते ?

ठहरे थे जो कुछ दिन आशियाने के लिये,
मेरे दिल के गाँव से ये बंजारे क्यु नही जाते ?

तोड़ चुका हुँ मैं अपनी कलम सौ दफ़ा,
मेरी गज़लो से उनके इशारे क्यु नही जाते ?

छोड़ तो दी हैं सारी ख्वाहिशे अपनी,
पर मुझसे ये ख्वाब तुम्हारे क्यु नही जाते ?

थक गयी हैं अब ये पलके मेरी,
आंखोँ से तुम्हारे नज़ारे क्यु नही जाते ?

इक अदद वक्त से कोशिश हैं सोने की,
मैं रात चाहता हूँ…ये सवेरे क्यु नही जाते ?

#SelfRachit

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“पहली मुलाकात…”

कल शाम मैं उसके पास बैठा था,
ऐसा लगा जैसे कोई खास बैठा था…

झांका जब उसकी निगाहो मे मैने,
इक शांत समन्दर मे कोई आकाश बैठा था…

देख रहा था वो मुझको मुस्कुरा कर कई दफ़ा,
मैं तो खो कर सारे होशो-हवास बैठा था…

उसकी छुवन का नशा अब तक ना गया मेरा,
मैं कल से युँही बदहवास
बैठा था…

इक मुलाकात भी कर देती हैं क्या हाल आदमी का,
मैंने ये कल जाना जब मैं उसके पास बैठा था…
☺️

#SelfRachit

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कुछ यूँ करते…

तु कहती तो तेरी आरज़ु करते,
हम भी तेरी जुस्तज़ु करते…

तुने हमे ठुकरा दिया वर्ना,
हम भी मोहब्बत रुबरू करते…

कुछ तुम कहती कुछ हम कहते,
रात भर युँही गुफ्तगू करते…

इक पल जो ठहर जाती तुम ,
हम बस ये किस्सा शुरू करते…

लिखे जाते जो मोहब्बत किस्से,
तुझे लैला करते मुझे मजनू करते…

मोहब्बतो के इन अफ़सानो मे,
हम अपनी कहानी मशहूर करते…

हमको तुमने ढीक से समझा नहीँ,
वर्ना तुम भी मोहब्बत ज़रूर करते!!

#SelfRachit

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फलसफ़ा…

मैने इंसान को खुदा होते देखा हैं,
कल मैने भूखे को खाना खिलाते देखा हैं…

जन्नत की आरज़ू ना रही मुझे,
गरीबी मे किसी को मुस्कुराते देखा हैं…

सारी ख्वाहिशे मेरी ज़मीन माँगने लगी,
कल बारिश मे बच्चो को नाव चलाते देखा हैं…

अपनी परेशानिया लगने लगी आसान मुझे,
दो रोटी खातिर किसी को 
पसीना बहाते देखा हैं…

मैने खुदा से कुछ भी माँगना छोड दिया,
बिन माँगे ही मैने उसे लुटाते देखा हैं…
🙂

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#SelfRachit

अकेला लगता हैं…

तेरे बिन हर पल अकेला लगता हैं…
राधा बिना जैसे कान्हा अकेला लगता हैं…

तु होती हैं तो किसी की ज़रूरत नही होती मुझे,
वर्ना भरी महफ़िल मे अकेला लगता हैं…

आँसु नही आते हैं अब, आंखोँ को सुना लगता हैं,
बारिश बिना जैसे सावन अकेला लगता हैं…

तू होती थी तो धड़कते रहता था,
अब धड़कन बिना ये दिल अकेला लगता हैं…

कैसे कह दू की नही हैं अब मोहब्बत तुझ से,
सच के बिना ये झूठ भी अकेला लगता हैं…

गुज़र जाती थी सारी रात तेरे ख्वाबो मे,
मेरी निंदो को सपनो बिन अकेला लगता हैँ…

तु खुश रहे…ज़िंदगी हैं तेरी…
मुझे तो सिर्फ और सिर्फ अकेला लगता हैं…

#SelfRachit

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“गज़ल…”

तेरा हँसना गज़ल जैसे…
तेरी बातें गज़ल जैसे…
मैं लफ़्ज हुँ,
तु हैं मेरी गज़ल जैसे…

तेरा लहज़ा गज़ल जैसे…
तेरा कहना गज़ल जैसे…
मैं सुनाता रहता हुँ,
तु हैं मेरी गज़ल जैसे…

तेरा काजल गज़ल जैसे…
तेरा गज़रा गज़ल जैसे…
मैं गुनगुनाता रहता हुँ,
तु हैं मेरी गज़ल जैसे…

तेरी आंखेँ गज़ल जैसे…
तेरी साँसे गज़ल जैसे…
मैं पढता रहता हुँ,
तु हैं मेरी गज़ल जैसे…

तेरी शरारत गज़ल जैसे…
तेरी आहट गज़ल जैसे…
मैं लिखता रहता हुँ ,
तु हैं मेरी गज़ल जैसे…

तेरी चाहत गज़ल जैसे…
तेरी मोहब्बत गज़ल जैसे…
मैं कोरा कागज़ हुँ, कहानी ये अधूरी हैं…
मेरी गज़ल जैसे…
🙂
#SelfRachit

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